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राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण बिल विधानसभा में हुआ पास, आंदोलनकारियों की मुराद हुई पूरी।

Dehradun: उत्तराखंड विधानसभा बुधवार को यूसीसी बिल पारित होने के बाद एक और बहुप्रतीक्षित बिल भी पास हो गया। चिह्नित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण वाला विधेयक संशोधन के बाद सर्वसम्मति से पास हो गया।
बुधवार को संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने चिह्नित आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक 2023 संशोधन के साथ पारित करने का प्रस्ताव रखा। जिसे बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया। विपक्ष ने भी विधेयक पर अपनी सहमति दी। स्पीकर ऋतु भूषण खंडूड़ी ने मंगलवार को प्रवर समिति की संशोधित रिपोर्ट को सदन में रखा था। 

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 08 सितंबर 2023 को धामी सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10 प्रतिशक्षत क्षैतिज आरक्षण विधेयक सदन में पेश किया गया था। जिसमें चिह्नित आंदोलनकारी अथवा उसके एक आश्रित सदस्य को क्षैतिज आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। जिसपर कुछ सदस्यों ने संशोधन के दृष्टिगत इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी। जिपस पर स्पीकर ने बिल को प्रवर समिति को भेजा। लगभग दो महीने बाद प्रवर समिति ने स्पीकर को संशोधित रिपोर्ट सौंपी।

क्षैतिज आरक्षण बिल के प्रावधान
– चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों के सभी पात्र आश्रितों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।

– चिह्नित आंदोलनकारी की पत्नी अथवा पति, पुत्र एवं पुत्री के साथ विवाहित, विधवा, पति द्वारा परित्यक्त, तलाकशुदा पुत्री शामिल।

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-2004 से क्षैतिज आरक्षण के माध्यम से सरकारी सेवा में शामिल हो चुके आंदोलनकारियों की सेवाओं को वैधता प्रदान करेगा।

– 1700 सेवारत आंदोलनकारियों व आश्रितों को फायदा।
– विधेयक कानून बनने के बाद उन करीब 1700 सरकारी सेवा में सेवारत आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को संरक्षण प्रदान करेगा, – 11 अगस्त 2004 या उसके बाद समय-समय पर जारी शासनादेश के तहत राजकीय सेवा में नियुक्त सेवारत आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को बिल से मिलेगा संरक्षण।

 

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