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इंफोसिस साइंस फाउंडेशन ने की इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेताओं की घोषणा, असाधारण स्कॉलर्स भारत में छह विभिन्न श्रेणियों में वैज्ञानिक शोधकार्य संबंधी उत्कृष्ट योगदानों के लिए सम्मानित

• प्राकृत और कन्नड़ काव्य से जुड़े विद्वान भी इंफोसिस प्राइज़ 2025 के लिए चुने गए छह विजेताओं में शामिल
• बेंगलुरु के वैज्ञानिक भी इंफोसिस प्राइज़ 2025 के छह विजेताओं में शामिल
• इंफोसिस प्राइज़ 2025 के छह पुरस्कारों में असाधारण रूप से फास्ट एल्गॉरिदम, हेल्थ इकनॉमिक्स, इलेक्ट्रोकेमिकल उर्वरक उत्पादन, प्राकृत काव्य संबंधी शोधकार्यों को किया गया सम्मानित।

देहरादून: इंफोसिस साइंस फाउंडेशन (ISF) ने आज छह विभिन्न श्रेणियों – इकनॉमिक्स, इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस, ह्यूमेनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़, लाइफ साइंसेज़, मैथमेटिकल साइंसेज़, एवं फिजिकल साइंसेज़ में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेताओं की घोषणा की है। इंफोसिस प्राइज़ ने अपनी स्थापना के समय से ही ऐसे व्यक्तियों/विद्वानों को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया है जिनके शोध तथा विद्वता ने भारत को उल्लेखनीय रूप से प्रभावित किया है। प्रत्येक श्रेणी में पुरस्कार के तौर पर एक स्वर्ण पदक, एक प्रशस्ति पत्र, और USD 100,000 (या भारतीय मुद्रा में समतुल्य) का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

इंफोसिस प्राइज़ 2025 के लिए विद्वानों का चयन निर्णायकों के अंतरराष्ट्रीय पैनल द्वारा किया गया जिसमें जाने माने स्कॉलर और एक्सपर्ट शामिल थे। इंफोसिस साइंस फाउंडेशन आरंभ से ही ऐसे उल्लेखनीय शोधकार्यों एवं विद्वता को मान्यता प्रदान करता रहा है जिन्होंने मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित किया हो। 2024 के बाद से, पुरस्कार का ज़ोर 40 वर्ष की उम्र से कम आयुवर्ग के शोधकर्ताओं को सम्मानित करने पर रहा है, ताकि असाधारण प्रतिभाओं की शीघ्र पहचान हो सके। अपने कॅरियर के शुरुआती स्तर में शोधकार्य से जुड़े व्यक्तियों को इस प्रकार प्रोत्साहित करना अगली पीढ़ी के स्कॉलर्स और इनोवेटर्स के लिए भी प्रेरक कदम साबित होता है।

इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेताओं की घोषणा, इंफोसिस साइंस फाउंउेशन के ट्रस्टियों द्वारा की गई जिनमें शामिल हैं – श्री के दिनेश (अध्यक्ष, ट्रस्टी मंडल), श्री नारायण मूर्ति, श्री श्रीनाथ बाटनी, श्री क्रिस गोपालकृष्णन, डॉ प्रतिमा मूर्ति, तथा श्री एस डी शिबुलाल। इंफोसिस साइंस फाउंडेशन के अन्य ट्रस्टियों ने, जिनमें श्री मोहनदास पाइ, श्री नंदन नीलेकनी, और श्री सलिल पारेख शामिल हैं, भी इस वर्ष के विजेताओं को बधाई दी है।

भारत में, इंफोसिस प्राइज़ ऐसा सबसे बड़ा पुरस्कार है जो विज्ञान एवं शोध में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है। इसके अलावा, इंफोसिस प्राइज़ के विजेता अन्य कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं जिनमें नोबेल पुरस्कार (अभिजीत बैनर्जी और एस्थर डफ्लपो), फील्ड्स मेडल (मंजुल भार्गव एवं अक्षय वेंकटेशन), द डैन डेविड प्राइज़ (संजय सुब्रमण्यम), द मैकआर्थर ‘जीनियस’ ग्रांट एवं ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ (सुनील अमृत), द ब्रेकथ्रू प्राइज़ इन फंडामेंटल फिजिक्स (अशोक सेन), तथा द मार्कोनी प्राइज़ (हरि बालकृष्णन) शामिल हैं। अनेक विजेताओं को रॉयल सोसायटी का फैलो भी चुना गया है जिनमें गगनदीप कांग शामिल हैं जो रॉयल सोसायटी की फैलो के तौर पर चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

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श्री के दिनेश, अध्यक्ष, ट्रस्टी मंडल, इंफोसिस साइंस फाउंडेशन ने कहा, “मैं इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेताओं को बधाई देता हूं जिनकी उपलब्धियां शोध, विज्ञान तथा समाज के बीच परस्पर और महत्वपूर्ण संबंध को दर्शाती हैं, और साथ ही, अगली पीढ़ी के इनोवेटर्स के लिए भी प्रेरणा बनती हैं। इंफोसिस प्राइज़ ने हमारे इस भरोसे को और पुख्ता बनाया है कि विज्ञान और शोध ही मानव प्रगति के प्रमुख आधार स्तंभ हैं। यह इनोवेशन को प्रोत्साहित करने वाली संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न विषयों की समझ भी बढ़ाता है।”

इंफोसिस प्राइज़ 2025 के तहत छह श्रेणियों में चुने गए विजेताओं का विवरण इस प्रकार है –

इकनॉमिक्स
इकनॉमिक्स में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेता के तौर पर निखिल अग्रवाल, पॉल ए. सैमुलसन प्रोफेसर ऑफ इकनॉमिक्स, मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को चुना गया है। उन्हें यह पुरस्कार मार्केट डिजाइन, एलोकेशन मैकेनिज़्म, मेडिकल रेजीडेंसी और किडनी एक्सचेंज एवं स्कूलों के विकल्पों से संबंधित व्यापक अध्ययन के लिए उल्लेखनीय विधि को लागू करने के लिए दिया गया। अधिकांशतः अर्थव्यवस्था में यह माना जाता है कि बाजार का अदृश्य प्रभाव कीमतों को इस प्रकार से प्रभावित करता है कि मांग आमातौर से आपूर्ति के बराबर हो जाती है। बेशक, संतरे और सेब के मामले में ऐसा सच भी होता है, लेकिन उन लोगों के संदर्भ में यह सिद्धांत इस तरह से काम नहीं करता जिन्हें किडनी की आवश्यकता होती है और जो इसकी आपूर्ति कर सकते हैं, या कॉलेज में प्रवेश की आकांक्षा रखने वाले छात्र ऐसे कॉलेज तलाश सकते हैं जो उन्हें प्रवेश दे सकें। इस प्रकार के मेल होने की संभावनाओं और समस्याओं को काफी कम समझा गया है। निखिल अग्रवाल के अध्ययन ने इस कम समझ के विषय को आंकड़ों के संदर्भ में रखकर, इस बारे में ऐसी समझ पैदा करने की कोशिश की है जिसे नीतिगत शक्ल में ढाला जा सका है।

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इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस
इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के लिए यूनीवर्सटी ऑफ टोरंटो के मैथमेटिकल एंड कंप्यूटेशनल साइंसेज़ के एसोसिएट प्रोफेसर (सीएससी) श्री सुशांत सचदेवा का चयन किया गया है। उन्हें एल्गॉरिदम थ्योरी के बारे में लंबे समय से पूछे जाने वाले सवालों के निपटान के संदर्भ में गणितीय समझ प्रदान करने के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है। इस समझ के चलते इंटरनेट, परिवहन और संचार नेटवर्कों समेत समाज की अन्य जीवनेखाओं के सहारे सूचनाओं के प्रवाह को प्रभावित करने वाली कंप्यूटेशनल समस्याओं में हासिल करने लायक प्रदर्शनों से संबंधित नए मानकों को स्थापित किया गया है। श्री सचदेवा थ्योरेटिकल कंप्यूटर साइंस में पुरोधा रहे हैं जिनके बुनियादी योगदानों ने आधुनिक समाज के समक्ष उपस्थित अनेक एल्गॉरिदम सबंधी चुनौतियों को गहराई से प्रभावित किया है।

ह्यूमेनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़
ह्यूमेनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़ में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेता के रूप में एंड्र्यू ऑलेट, एसोसिएट प्रोफेसर, साउथ एशियन लैंग्वेजेस एंड सिविलाइज़ेशंस, यूनीवर्सटी ऑफ शिकागो को चुना गया है। वह प्राकृति भाओं के मामले में, वर्तमान पीढ़ी में विश्व के अग्रणी विद्वान हैं। उनकी पुस्तक, लैंगवेज ऑफ द स्नेक्स, पिछले दो वर्षों के दौरान, प्राकृत एवं संस्कृत समेत अन्य कई भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं की सांस्कृतिक भूमिकाओं का व्यापक स्तर पर विश्लेषण उपलब्ध कराती है। एंड्र्यू ऑलेट की भाषायी विद्वता तथा उनका ज्ञान, जिसमें संस्कृत, प्राकृत, कन्नड़, तमिल, प्राचीन जावा, और चीनी भाषाओं के प्रति लिए उनका व्यापक योगदान, तथा ग्रीक एवं लैटिन में उनका प्रशिक्षण तथा आधुनिक यूरोपीय भाषाओं की उनकी जानकारी, हतप्रभ करने वाली है। संस्कृत साहित्य एवं अन्य भारतीय भाषाओं में ऑलेट की विद्वता के चलते, दक्षिणपूर्वी एशिया के सुदूरतम क्षेत्रों तक में भारतीय संस्कृति की उल्लेखनीय व्यापक पहुंच को समझना आसान हुआ है।

लाइफ साइंसेज़
लाइफ साइंसेज़ में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के विजेता के तौर पर एंड्र्यू अंजना बदरीनारायणन, एसोसिएट प्रोफेसर, नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल सांइसेज़, बेंगलुरू का चयन किया गया है। जीनोम मेंटीनेंस एवं रिपेयर की प्रणालियों की समझ प्रदान करने में उनके योगदान के लिए सुश्री अंजना को चुना गया है। इनोवेटिव लाइव-सेल इमेजिंग और जेनेटिक एवं सेल बायोलॉजिकल एप्रोच के मेल पर आधारित उनके शोधकार्य से यह पता चला कि किन बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर डीएनए को पहुंची क्षति की मरम्मत की जाती है, और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए डैमेज रिस्पॉन्स की नई राह तलाशी जाती है, और इस प्रकार जीवन एवं विकासक्रम के बुनियादी सिद्धांतों पर रोशनी डाली गई है। अपने जीनोम की सुरक्षा के लिए कोशिकाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सार्वभौमिक रणनीतियों को उजागर करते हुए, उन्होंने जीनोम एवं माइक्रोबायल बायोलॉजी के क्षेत्रों को और उन्नत बनाया है तथा जीनोम की स्थिरता और कोशिकाओं के लचीलेपन के बारे में शोध को भी नई दिशा प्रदान की है।

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मैथमेटिकल साइंसेज़
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई में स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर सब्यसाची मुखर्जी को इंफोसिस प्राइज़ 2025 के अंतर्गत मैथमेटिकल साइंसेज़ में पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें यह पुरस्कार गणित के दो अलग क्षेत्रों – डायनमिक्स ऑफ क्लीनियन ग्रुप एक्शंस तथा आइटरेशन ऑफ होलोमॉर्फिक एंड एंटी-होमोमॉर्फिक मैप्स इन कॉम्प्लैक्स डायनमिक्स को परस्पर संबद्ध करने वाले उनके प्रभावशाली तथा मूल कार्य के लिए प्रदान किया गया है। उनके शोध के नतीजों ने इस विषय में हमारी समझ को काफी बदला है, जिससे फिजिक्स, फ्लूड डायनमिक्स और यहां तक कि डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों पर व्यापक रूप से असर पड़ा है।

फिजिकल साइंसेज़
फिजिकल साइंसेज़ में इंफोसिस प्राइज़ 2025 के लिए सस्टेनेबल इलेक्ट्रोकेमिकल रूट्स टू इज़ेन्शियल केमिकल्स के क्षेत्र में पुरोधात्मक कार्यों के लिए कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (काल्टेक) के प्रोफेसर ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग कार्तिश मंथीराम को चुना गया है। लीथियम-मेडिएटेड एमोनिया सिंस्थेसिस एवं ऑकसीजन-एटम ट्रांसफर कैटेलिसिस ने इलेक्ट्रिफाइड केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग की हमारी समझ में काफी बदलाव करते हुए यह प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार नवीकरणीय बिजली से ऐसे रसायनों का चुनींदा रूप से कुशल सिंथेसिस किया जा सकता है जो कृषि एवं उद्योग के लिए आधारभूत रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

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